Wednesday, December 11, 2019
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Chadariya Jhini Re Jhini- Live by ajay kapil

Ram Bhajan- Chhadariya Jhi re jhini- Live by Ajay kapil raag- khamaj Tabla- GG Bharti Sitar- Sarver Hassan Flute- Anil Akheda Percussion- Anurodh Jain Keyboard- Lalit Kapil
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Nirgun Bhajan – Pawan Atma

Bhajan - Pawan Atma Singer and Music- Ajay Kapil Lyricist- Kishan Bamnawat Presented by - Niharika Productions पावन आत्मा से परमात्मा का, सुमिरन करता जा II जोड़ जोड़ अहंकार की पूँजी , अपने से ही दूर हुआ I घट के प्रभु को त्याग के क्यों तू, मद में ऐसा चूर हुआ II पीकर राम नाम का रस मद प्याला, भंजन करता जा II पावन आत्मा से…………… नर में ही नारायण बसते , इनकी सदा ही सेवा करना I कटु वचन मत कहना किसी को , कटु वचन का घाव न देना II धीरज धरम को अपना ले और मन को , चन्दन करता जा II पावन आत्मा से …………… जो विश्वास की डगर पे चलते , उमको सदा ही राम मिले I साँची कहे बमनावत जो कोई , मिथ्या मने हाथ मले II आत्मा दर्पण में परमात्मा का , दर्शन करता जा II पावन आत्मा से …………………..
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Nirgun Bhajan – Jori Re

Bhajan- Jodi Re Singer and Music- Ajay kapil Lyricist- Kishan Bamnawat Presented by- Niharika Productions जोड़ी रे , अधम की पूँजी जोड़ी रे I फोड़ी रे , करम की गोलक फोड़ी रे II गिन गिन ढ़ेरी सबकी बनाई , भक्ति प्रेम की छोटी पाई , मानक मोती कोड़ी रे II दुर्जन संग का भेद न जाना , विपत्ति काल में ये पहचाना I छोड़ी रे , संकट में बांह छोड़ी रे II जोड़ी रे , अधम की पूँजी जोड़ी रे II धनी हुआ रे करम का निर्धन , भिक्षा भक्ति की दे दो भगवन I खोली रे , झोली बमनावत खोली रे II जोड़ी रे , अधम की पूँजी जोड़ी रे II महल बना के चड़ा अटारी , तनिक न मूरख नीचे निहारी I दौड़ी रे , मति की चकरी दौड़ी रे II जोड़ी रे , अधम की पूँजी जोड़ी रे II
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Nirgun Bhajan – Shradhha Bhakti

Bhajan- Shraddha Bhakti Singer and Music- Ajay Kapil Lyricist- Kishan Bamnawat श्रद्धा भक्ति हो गर मन में , बोलते हैं पत्थर भी I जिन पर लिख दें नाम राम का , तैरते हैं पत्थर भी II गौतम ऋषि के श्राप से देवी अहिल्या पथराई I मुक्त श्राप कर दीनी , ऐसी किरपा करी रघुराई II बनकर सुन्दर नारी देखो , पकडे चरण पत्थर भी ई हरिण कश्यप दानव जब खुद बन बैठा भगवान I तब प्रहलाद के रूप में जन्में , परम भक्त संतान II सुनकर विनती भक्त की भगवन , चीरते हैं पत्थर भी II एक ब्राह्मण ने धन्ना भगत को ऐसा मुर्ख बनाया I सिल का बटना देकर उसको सालिगराम बताया II कहे बमनावत भोग लगाये , भक्ति से पत्थर भी II श्रद्धा भक्ति हो गर मन में , बोलते हैं पत्थर भी I जिन पर लिख दें नाम राम का , तैरते हैं पत्थर भी II
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Nirgun Bhajan- Re Bandhu

Nirgun Bhajan- Re Bandhu by ajay kapil singer and music- ajay kapil lyrics- kishan bamnawat रे बन्धु काहे अकड़ता है रे बन्धु काहे झगड़ता है I माया मीत किसी के नहीं क्यूँ, इसमें उलझता है II माया से ही लोभ हैं उपजे, माया का है खेल I माया ने सब जाल बिछाया , जीवन बन गया जेल II मोह माया और ममता के क्यूँ, पीछे पड़ता है II माया के ही रूप हैं सारे, धन जोबन संतान I माया पाश भयंकर इसने, बंधा हर इंसान II दुःख का बोझ बने ये सारे, दुःख का बोझ बने ये सब क्यूँ ,इनमें उलझता है II आज नहीं तो कल माया तुझको धोखा दे जाएगी I जिसके पीछे इतराता है, एक दिन हाथ छुड़ाएगी II साँची कहे बमनावत रे क्यूँ , मूरख बनता है II